Prince 06 Jun 2023 कविताएँ समाजिक #Google #हिन्दी कविता #समाजिक #हिन्दी साहित्य #माँ 51809 1 5 Hindi :: हिंदी
जग के आँगन में माँ की मुस्कान,
खुशियों का पर्व और आंचल की छाँव।
वो दुःखों की बारिश में भी छाता,
अपने संसार का सुन्दर आधार बनाव।
माँ के आंचल में सुखी सपनों की झिलमिल,
उनके आँचल में बचपन की मिठास।
हर संकट की घड़ी में उनकी चाहत का झरना,
माँ की ममता ही संसार का आनंद और महानता का प्रतीक रहा।
संभल के पाली हमें दुनिया में माँ ने,
दिया जीवन का अनमोल उपहार।
हर समस्या में हमें आगे बढ़ाने वाली,
वो हैं जीवन की देवी, माँ हमारी प्यारी।
प्यार की गहराई उनकी आँखों में समाई,
माँ की ममता का कोई ठिकाना नहीं।
जीवन की लड़ाई में हमें सबक सिखाई,
माँ की आँचल से हमने अच्छाई जानी।
माँ, तू ही है दुनिया की दुलारी,
तेरी ख़ुशियाँ हमारी ख़ुशियाँ हैं।
जब भी हमें लगे थक गए हमारी कड़ी,
माँ की गोद में पाएं सुकून की सांसें।
तेरी आँखों की चमक जैसे तारों की झिलमिल,
तेरी मुस्कान जैसे बादलों का छाँव।
तू ही है जीवन का सार।
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लेखक : प्रिंस ✒️📗
Hey there I'm Prince from VPO kuralsi district Muzaffarnagar UP - 251309. I keenly love to write sto...