संदीप कुमार सिंह 22 Jun 2023 कविताएँ प्यार-महोब्बत मेरी यह कविता समाज हित में है। जिसे पढ़कर पाठक गण काफी लाभान्वित होंगें। 39872 0 Hindi :: हिंदी
यात्रा में मैं अब चला, ले कर सभी समान। सुखद सवारी रेल है, बहुत जरूरी काम।। तैयारी कर कर सभी, मन में है अति हर्ष। मधुर मिलन की आस है, करे सदा आकर्ष।। स्टेशन पर गाड़ी रुकी, लगी हुई है भूख। खाया रोटी दाल को,गायब मन से सूख।। धीरे धीरे गाड़ी बढ़ी, मन में है अति चाव। दृश्य सभी से हो खुशी, गम का है अभाव।। अगल बगल शुभ लोग हैं, करें मग्न में बात। मैं भी खुश हूं बात कर, होने को अब रात।। (स्वरचित मौलिक) संदीप कुमार सिंह ✍🏼 जिला:_समस्तीपुर(देवड़ा)बिहार
I am a writer and social worker.Poems are most likeble for me....