Avnish Dutt 01 May 2026 कविताएँ देश-प्रेम Poem for Gautam Bhudh, elightment of Gautam Bhudh, Gautam Bhudh poetry, Gautam Bhudh 12426 0 Hindi :: हिंदी
*महात्मा बुद्ध को आत्मज्ञान* जिस कुमार के जन्म दिवस पर, पिता ने पुत्र का नाम रखा सिद्धार्थ था, जिस का उद्देश्य पूर्ण हो गया हो, उनके नाम करण का यही आधार था। पिता शुद्धोधन की ईश्वर से सिर्फ यही कामना थी, दुखों से न वास्ता पड़े पुत्र का, उनकी अलग अलग योजना थी। भाग्य का लिखा भला कौन मिटा सकता है, महल से बाहर कदम रखते ही सिद्धार्थ को, बूढ़ा, बीमार, मृत और सन्यासी, सर्वप्रथम दिख जाते है। मन में उस राजकुमार के, गहन विचार फिर आते है, इस दुख का निवारण हो कैसे, इस सवाल का जवाब ढूंढने को, वह महल छोड़ निकल जाते है। ज्ञान की ज्योति अब उन्हें जगानी थी, सत्य की खोज करने की अब उन्होंने ठानी थी। कई वर्षों के तप से भी, जब वह सत्य को नहीं जान सके, तृष्णा अभी भी शेष थी शायद, इसलिए स्वयं को भी नहीं मान सके। बोधगया में अब, सही विचार का सही समय आया था, पीपल के वृक्ष के नीचे, सिद्धार्थ को आत्मज्ञान का बोध आया था। वे अपने सिद्धांतों पर अडिग थे, पिता ने उनके चरण स्पर्श किए, क्योंकि अब वे उनके सिद्धार्थ नहीं, महात्मा बुद्ध थे। जीवन को जिए कैसे, मध्यम मार्ग उन्होंने दिखलाया है, अहिंसा और करुणा के माध्यम से, दुखों का निवारण बताया है।