Anilkumar Rathwa (Sameer) 17 Nov 2025 कविताएँ समाजिक "मेहनत का जादू" 15592 0 Hindi :: हिंदी
लक का तो पता नहीं, पर किस्मत भी झुक जाती है हौसलों के आगे, जो चलते रहते हैं चुपचाप, मंज़िल लिख देती है उनका नामे-भाग्य के पन्नों पर। धूप कितनी भी तेज़ क्यों न हो, मेहनत की छाँव कभी कम नहीं पड़ती, जो ठोकरों को गुरु बना ले, उसे दुनिया की कोई दीवार रोक नहीं सकती। अवसर हर किसी के दरवाज़े पर नहीं जाता, पर मेहनत करने वालों की राह ज़रूर ढूँढ लेता है, क्योंकि पसीने की खुशबू से कर्म का दरबार हमेशा महकता है। रात भले ही लंबी हो जाए, पर सुबह मेहनत वालों की ही चमकती है, लक कभी-कभी सो जाता है, लेकिन अवसर… कभी नहीं सोता— बस ढूँढता है हिम्मत वालों को।