आकाश अगम 27 May 2023 कविताएँ अन्य #poetry #akashagam #zazbat 29305 0 Hindi :: हिंदी
मैं अमीर हूं इतना कि अपने भीतर सारी दुनिया को पनाह दिए रहता हूं और ग़रीब हूं इतना कि अपने लिए ही जगह नहीं एक कोने भर भी!
Login to post a comment!
जीवन की इस आपाधापी में बिखरती जा रही श�...