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मैं भी एक ताजमहल बनाऊं

MD SHAYEED ALAM 11 Apr 2026 कविताएँ हास्य-व्यंग हास्य कविता 5858 0 Hindi :: हिंदी

मैं भी सोचता था किसी की याद में ताजमहल बनाऊं, 
पर क्या करूं मुमताज मिलती ही नहीं। 
1 दिन किस्मत खुली, 
मुमताज मिली,
अब सोचता हूं ताजमहल बनाऊं,
तो मेरी मुमताज मरती ही नहीं।।

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