Deepak nayak 30 Mar 2023 कविताएँ अन्य जीने की एक चाह 48853 0 Hindi :: हिंदी
“ मैं जीना चाहती हूँ “
मैं एक ख़ुशबूदार फूल नही
बेसुमार आवाज़ बना चाहती हूँ ,
मैं करोड़ों मैं एक चाँद नही बल्कि
एक मामूलीसा सितारा बना चाहती हूँ !
मैं सीधी- सी ज़मीन नही
टेढ़े से रास्तों पर चलना चाहती हूँ ,
मैं आसमानी ख्वाब नही
ज़मीनी ख्वाब- सी ज़िंदगी जीना चाहती हूँ !
मैं गानो का जुनून नही बल्कि
नग़मों का सुकून बन्ना चाहती हूँ ,
मैं सौंदर्य भरा चाँद नही ,
एक उम्मीद भरा सूरज बन्ना चाहती हूँ !
मैं समंदर की लहर नही
पानी की बूँद बन्ना चाहती हूँ ,
मुझे किसी मंज़ील का जुनून नही
मैं बस सत्य के रास्ते पर चलना चाहती हूँ !
-प्रो. दीपक नायक