Chinta netam " mind " 30 Mar 2023 कविताएँ देश-प्रेम देश प्रेम 59222 1 4 Hindi :: हिंदी
//...मजहबी उन्माद...//
मानव मस्तिष्क के ,
एक कोने में,
जमा हुआ मवाद ...!
सारे मानव समाज को ,
सड़ाता, गलाता घाव
मजहबी उन्माद....!
मरती माताएं ,
लुटती अबलाएं ...!
होती कितनी ,
मर्माहत घटनाएं ...!
यह कराता कत्लेआम ,
सरेराह ,सरेआम
दंगे और फसाद ...!
उदाहरण के तौर पर ,
सामने इतिहास पड़ा
लो कर लो याद ...!
मेरे देशवासियों ,
मेरी तुमसे विनम्र विनती ,
फिर ना आए ,
गुजरा हुआ कल ...!
सबका अच्छा हो,
आने वाला पल ...!
इसलिए अपने विचारों से ,
कर दो इसे आजाद ...!
आओ एक हो सभी
मिटे मन से यह उन्माद ...!
चिंता नेताम "मन"
डोंगरगांव(छत्तीसगढ़)