Join Us:
दिशा-लाइव ग्रुप ने लॉन्च किया नया ब्रांड BizPry - लोकल से ग्लोबल तक 20 मई स्पेशल -इंटरनेट पर कविता कहानी और लेख लिखकर पैसे कमाएं - आपके लिए सबसे बढ़िया मौका साहित्य लाइव की वेबसाइट हुई और अधिक बेहतरीन और एडवांस साहित्य लाइव पर किसी भी तकनीकी सहयोग या अन्य समस्याओं के लिए सम्पर्क करें

मन कि उलझन-आज फिर मेरी जुवा लड़ खराने लगी है

सुजीत कुमार झा 16 Dec 2023 कविताएँ प्यार-महोब्बत Googal 42010 0 Hindi :: हिंदी

आज फिर मेरी जुवा लड़ खराने लगी है, उसकी यादे दिल को अंदर हि अंदर जलाने लगी है।धुंआ धुंआ सा मंजर आँखों पे छाने लगी है, लव भी उसी कि गीत गुनगुनाने लगी है।ना अब वो प्यास थी ना ओठो पर वो ओठो वाली मिठाश थी, वदन पर भी ना वो आधा-आधा लिवाश थी।कमरे मे भी ना कुछ खास थी ना कोई मेरे आस पास थी, ना किसी के होने की आभास।फिर भी उस मंजर के तिल-तिल की आभास थी, बस मन के अंदर हि अंदर दौड़ती वो कोई खास थी।कुछ पल मे ही महकने लगा तन वदन, अंदर ही अंदर चल रहा था वो पुराना पवन।मन कहता था तु बढ़ा दे कदम ,दिल कहता था मत कर जतन थोड़ा सोच ले फिर बढ़ाना कदम।आँखों के नीर मे बन रही उसकी तस्वीर मे, बंद परे मेरे तकदीर मे उसकी आभा अंदर ही अंदर डूबने लगी थी।पता नहीं क्यू डर सा मेरे मन को घुमाने लगी थी, फिर भी उसे पाने कि चाहत दिल को हिलाने लगी थी।इसी उलझन मे रात बित जाने लगी थी,सुबह कि किरण भी धीरे-धीरे पास आने लगी थी।

Comments & Reviews

Post a comment

Login to post a comment!

Related Articles

शक्ति जब मिले इच्छाओं की, जो चाहें सो प्राप्त कर लें। आवश्यकताएं अनन्त को भी, एक हद तक प्राप्त कर लें। शक्ति जब मिले इच्छाओं की, असम्भ� read more >>
शक्ति जब मिले इच्छाओं की, जो चाहें सो हांसिल कर कर लें। आवश्यकताएं अनन्त को भी, एक हद तक प्राप्त कर लें। शक्ति जब मिले इच्छाओं की, आसमा read more >>
इच्छा शक्ति 🥀🥀 शक्ति जब मिले इच्छाओं की, जो चाहें सो हांसिल कर कर लें। आवश्यकताएं अनन्त को भी, एक हद तक प्राप्त कर लें। शक्ति जब मिल� read more >>
Join Us: