Ashok Kumar Kapil 30 Mar 2023 कविताएँ धार्मिक #maadurga #dharm #inspiration #spiritual 44132 0 Hindi :: हिंदी
मंगलाचरण दूर करो दुर्गति हमारी सिंहवाहिनी दुर्गा विश्वपलिनी दुष्ट्नाशिनी ,त्रिपुरसुंदरी,अन्नपूर्णा दुर्गा देर भई माँ अब तो प्रकटो काम तनिक यह कर दो दूर करो जग का अंधियारा इसको जगमग कर दो माँ दुर्गा से निवेदन सूख रहा जीवन का रस छूट रहा है धीरज सारा अन्ध्कार सब ओर घिरा हो सूझे न जब कोई किनारा तुम यह सब चुपचाप न देखो बरसा दो अमृत की धारा 2 सुख स्वपन बने हों जब धूमिल जीवन करता हो छ्ल ही छल हों बंधन में निज प्राण बंधे और सब मुक्ति के प्रयास विफल किसी और द्वार पर ना जा कर पुकार करें ना और किसी का मांगें सहारा 3 कब तक हम चुपचाप रहें और लिए अधूरी प्यास रहें अपने छोटे से आँचल में निराशा और अविश्वास लिए अब मिटें हमारे सारे गम मुसकाए फिर जीवन सारा 4कर असत्य विदीर्ण सत्य प्रतिष्ठित तुम्ही करातीं देख तुम्हारा तेज कोटी कोटी सूर्यों की किरणें लजातीं माँ जीवन को मृत्यु पर विजय तुम्ही दिलवातीं नव रचनायें रच जगत का सरजन तुम्ही करातीं हे शब्द विचारतीत रुके अब जग का क्रंदन हे दयामयी जननी हम करें तुम्हारा वंदन ५ हे शुभ्र वसना माँ तुम ही सब कुछ करतीं हे दयामयी माता तुम जग की जड़ता हरतीं क्ल्याणकारी तत्व में तुम्ही शक्ति हो भरती जब चारों ओर हो जलथल जलथल प्राण प्यासे फिर भी तरसें अब तुम ही करो उपाय कि सूखे जीवन में रस बरसे छिपा कर अपने दुःख दर्द को जीना ही जिन्दगी का नाम है ले क्रर भगवान का सहारा विपरीत प्रिथितियों में आगे बढना ही हमारा काम है- अशोक