Mamta pannu 30 Dec 2025 कविताएँ अन्य मेरे जमींदार बापू ,मेरे किसान बापू 9518 0 Hindi :: हिंदी
मैंने देखा... अपने बापू को पसीने से लथपथ खेतों में काम करते हुए । हम ac की कूलिंग से घिरे, वो पसीने से भरे । मैंने देखा... अपने बापू को खेतों की मेड पर ठंड से ठिठुरते हुए । हम गर्म कपड़ों में उलझे, वो बिना कंबल सर्दी से झूझे । उनकी इस कामयाबी के लिए मुझे कामयाब होना है ।। ममता पन्नू *यह कविता अमर उजाला काव्य पर प्रकाशित हो चुकी है ।।