MD SHAYEED ALAM 16 Nov 2025 कविताएँ देश-प्रेम कविता मोहम्मद सईद आलम 9351 0 Hindi :: हिंदी
मत करो तुम हिंदू मुसलमान, दोनों के रगों में है लहू एक समान । दोनों ही हो भारत मां की संतान, मत करो तुम हिंदू मुसलमान। साथ पले तुम साथ बढ़े तुम, साथ में हुए हो जवान। तो आज क्यों हो एक दूसरे से परेशान? मत करो तुम हिंदू मुसलमान। देश की आजादी में दोनों ही हुए हो कुर्बान, तो रखो अपनी मातृ भूमि का तुम अभियान। ना आओ भ्रष्ट नेताओं की बातों में तुम, उनका तो लड़ाना ही है काम। अपनी कुर्सी की खातिर कर देंगे तुम्हें वो कुर्बान। मत करो तुम हिंदू मुसलमान। एक थे बिस्मिल एक अशफ़ाक उल्ला खान, एक थे पंडित एक थे मुसलमान, दोनों ने दी देश के लिए अपनी जान। क्या उन्होंने कभी किया हिंदू मुसलमान? तो तुम भी ना करो हिंदू मुसलमान, देश का हमेशा करो तुम सम्मान।।