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मटकी फोड़

Jeevan kumar 26 Aug 2025 कविताएँ बाल-साहित्य जन्माष्टमी के दिन लिखी गई छोटी सी कविता। 11856 0 Hindi :: हिंदी

सोचा! फोड़ दूंगा, मोड़ दूंगा,
‘मटकी’ को तोड़ दूंगा।

की ‘कोशिश’ न टूट पाई,
हुआ ‘मज़ाक’ बच्चों में छाई।

मान ‘हार’ में बैठ गया,
फिर भी ‘खुश’ में हो गया।

नियम ‘विजय’ का होता है,
‘जीत’ के आगे ‘हार’ होता है।

कर ‘संघर्ष’ हासिल जीत है,
समय–समय की ‘रीत’ है।

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