akhilesh Shrivastava 03 Aug 2024 कविताएँ समाजिक सावन के महीने में एक बेटी का मैया के नाम संदेश 97583 0 Hindi :: हिंदी
*कविता*
*मायके की याद*
सावन में मैया मायके
की याद बहुत आती है
बचपन की यादों में मैया
आंखें नम हो जाती हैं।
बरसाती पानी में मैया
हम खूब मौज मनाते थे
आंगन के भरे पानी में
छप - छप करने जाते थे।
सखी -सहेली संग हाथों में
मेंहदी खूब रचाते थे
भाई -बहिन संग मैया
हम झूला झूलन जाते थे।
भाई बहिन के प्यारे रिश्तों
की याद नहीं जाती है
रक्षाबंधन के दिन मैया
मायके की याद सताती है।
राखी की चिठ्ठी भैय्या
मैं कैसे लिख पाती हूं
मन ही मन रोकर भैय्या
मैं आंसू पी जाती हूं।
तेरे आंगन की चिरैया
मां अब नहीं फुदकती है
सावन आते ही मैया
यादों में खोई रहती है ।
छूट गया है मायका जब से
सावन भारी पड़ जाता है
आंसू की बरसात में
मैया सावन कट जाता है।
रचियता ---अखिलेश श्रीवास्तव
I am Advocate at jabalpur Madhaya Pradesh. I am interested in sahity and culture and also writing k...