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मेरा हमसफ़र

महेश्वर उनियाल उत्तराखंडी 21 Jun 2026 कविताएँ प्यार-महोब्बत 2752 0 Hindi :: हिंदी

“मेरा हमसफ़र”

जब जवां हुऐ थे जज्बात हमारे
हुए एक दिन पीले हाथ हमारे,
फिर घर आयी उनकी बारात हमारे
कदमों से कदम मिला के चले वो साथ हमारे।


खुशियां भी देखी कभी गमों के कांटे भी देखे
इनके बीच कभी हम हारे, कभी जीत गये
मिले थे एक दिन ऐसे कि, फिर
चलते-चलते कई वरस बीत गये।


गौर से देखूं जब इस फूल को तो
वो आज भी कलि नजर आती है
और इसके मन की कोमलता
मेरे दिल को सुकून दिलाती है।


लड़ती और झगड़ती है मुझसे
वो कभी यूंही रूठ जाती है
मिलूं न मै गर उसे तो
वह टूट जाती है ।




खुद की उम्र का तो पता नहीं है उसे
पर मेरी लम्बी उम्र की खातिर वो
अपनी मांग में सिंदूर लगाती है ।


जन्मों-जन्मों तक हम साथ रहेंगे
हर दुआ में बस यही कहते है,
दो जिस्म भले ही दिखते है हम
पर एक जान में रहते हैं।।

रचनाकारः- महेश्वर उनियाल

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