Baba ji dikoli 29 Apr 2023 कविताएँ समाजिक Kaveeta /shayri/gajal/geet /sangeet/nagma|/ 28138 0 Hindi :: हिंदी
मित्रो से घिरी रही जिन्दागी हमारी पर खास कुछ ही रहे... कुछ आये जरूरते लेके ,तो कुछ जरूरत बन गए किसी सुनाया हल ऐ दिल अपना तो कुछ हमारा सुन गये कुछ आये दोस्ती का फरमान लेकर .... तो कुछ बगल में खंजर रख गये । कुछ ने बताया जान से बढ़कर हमें ,तो कुछ दगा कर गये कुछ ने निभाया बखूबी किरदार अपना ,तो कुछ मुह मोड़ कर निकल गए। कुछ करते थे जान बारने की बात मुझ पर तो कुछ जान के दुश्मन बन गए। ठेहर सा गया ये शिलशिला यही , अब सभी जिम्दारियों से घिर गए। हम दो दोस्त थे पुराने बस अब दो ही रह गए @baba ji dikoli