RANJIT MAHATO 30 Mar 2023 कविताएँ समाजिक मन का सुकून mann ka sukun 53432 0 Hindi :: हिंदी
मन का सुकून कहीं बाहर नहीं मिलता ,
अपने अंदर खोजो वो मिल जायेगा I
मन का सुकून कहीं बाहर नहीं मिलता ,
कर्म बदलो आपको वो मिल जायेगा I
मन का सुकून कहीं बाहर नहीं मिलता ,
सोच बदलो आपको वो मिल जायेगा I
मन का सुकून कहीं बाहर नहीं मिलता ,
नजर और नजरिया बदलो वो मिल जायेगा I
By-Ranjit Mahato
My name is Ranjit Mahato and I am self-employed by profession. I have a passion for reading and writ...