Meena ahirwar 10 Jun 2023 कविताएँ समाजिक कविता- नारी शक्ति# आत्मनिर्भर नारी। 38945 0 Hindi :: हिंदी
नारी शक्ति समर्पण तु, ना हैं अब अबला । जागो उठो अब सशक्त बनो , हर नारी मैं दुर्गा । अत्याचार को ख़ुद रोको, ना बनो अब अबला । कोई छल कर तो , जम कर लो बदला । आये जब इज्जत की बात , तो ले काली का भी अवतार । जागो उठो सशक्त बनो , हर देश की अब महिला । उद्देश्य- नारी पर बड़ते अत्याचार को रोकना। केवल सरकार या समाज का ही काम नहीं। बल्कि हर एक नारी का कर्तव है की वह स्वयं सशक्त बने। और अत्याचार को रोके। मीना अहिरवार, जिला- छतरपुर (म.प्र) ।