राहुल गर्ग 28 Feb 2024 कविताएँ समाजिक Aurat, Charitra, Character of Women. Women Character 23859 0 Hindi :: हिंदी
तुम्हारे एक इशारे पर, अपनी आंखें चार कर देगी। छोटी सी भी बात को, अखबार कर देगी।। कितना भी मुस्कुराकर करना चाहो उससे हसरतें पूरी। तुम्हारी ख्वाहिशों को इंकार, वो हर बार कर देगी।। इल्ज़ाम तुम पर आए, तो स्वीकार कर लेना मेरे दोस्त। वरना इज़्ज़त को नीलाम, वो सरे बाजार कर देगी।। धोखे से भी भिड़ मत जाना तुम उससे मैदान ए जंग में। शस्त्र उठाने से पहले, वो तुम पर वार कर देगी।। हो यदि गुरूर तुम्हें भी अपनी मर्दानिगी का। तो कभी उसकी भूख को मिटाना, शर्मसार कर देगी।। बहस भी हो जाए, तो कवच शालीनता का पहन लेना वर्ना बातों के खंजर से तुम्हें, लहू-लुहान कर देगी।। नाजायज़ रास्तों पर चलकर, उसकी नजरों से मत गिरना। कभी फिर उठ नहीं पाओगे, ऐसा लाचार कर देगी।। प्यार के धागे से उसे, यदि बाँधकर रख लिया। तो जिंदगी की हर कश्ती को तेरी, मिलकर पार कर देगी।। जीवन के हर डगर में तू उसे साथ रख लेना। अपनी मेहनत से तेरा हर सपना, वो साकार कर देगी।। वफा-ए-इश्क करता है, तो विश्वास उस पर भी रख। खुद को अग्नि के हवाले, वह सौ बार कर देगी।। तू रूखसत भी हो गया जहाँ से, तो कोई गम नहीं। परिवार में तेरी कमी को पूरा, बार बार कर देगी।।