Santosh kumar koli ' अकेला' 30 Mar 2023 कविताएँ समाजिक पद-चिन्ह 49907 0 Hindi :: हिंदी
मानव पर अखिलेश्वर, बड़ा मेहरबान। बनाया हमें ज्ञानी, बलशाली और बुद्धिमान्। एक राहगीर करे, जीवन सफ़र की शुरूआत। थोड़ी दूर पर उसे मिले, कुछ पद- चिन्हों का साथ। अच्छे लगने लगे उसे, करे अनुसरण की बात। खुद क़दम रखे उनमें, यहीं खा गया मात। ऐसे व्यक्ति क़दमों के, कैसे छोड़े निशान। बनाया हमें ज्ञानी, बलशाली और बुद्धिमान्। लगे हम दूसरों की, तरह ज़िंदगी जीने। खुद के विचार त्याग दिए, औरों के विचार छीने। औरों की तरह बनने का, लगे मीठा ज़हर पीने। खुद के सपने, सोच फाड़,पर विचारों से लगे सीने। निज का समय बरबाद कर, औरों का करे बखान। बनाया हमें ज्ञानी, बलशाली और बुद्धिमान्। एक बार खुद पर, करके देखो विश्वास। मृग कस्तूरी जैसे, मत ढूंढ़ो जंगल में घास। पहचानों निज सोच, सपने दुनिया होगी दास। आए जैसे मत जाओ, कुछ करो जगत् में ख़ास। कमियों को छोड़ो, गुणों का करो गुणगान। बनाया हमें ज्ञानी, बलशाली और बुद्धिमान्। मानव पर अखिलेश्वर, बड़ा मेहरबान। बनाया हमें ज्ञानी, बलशाली और बुद्धिमान्।