Santosh kumar koli ' अकेला' 19 Feb 2026 कविताएँ समाजिक प्रेम हवाल- हवाला 7226 0 Hindi :: हिंदी
एक था दीया, एक बाती। जीवन रोशन करते, बन जीवन साथी। दीये हिये प्रेम से, लवलीन बाती। हवा हलराती बातें करती, आती-जाती। दीया हिये से उँडेलता प्रेम तेल। प्रेम रेल पेल रेला में, घुसा भ्रम सेल। छिटक गई बाती, बौराकर हुई बिन नकेल। समय समझ के फेर, फेर दिया जीवन खेल। उड़ती रही ज्यूँ खाली खेत, पागल चिड़िया। चित् पड़ा चित, हटी अँघौटी, आई हिफ़्ज़ मूल बतिया। हुई देर, अंधेर, मूल मिल गया मिटिया। अब पछतावे क्या होत, जब खेत चुग गई चिड़िया।