Join Us:
दिशा-लाइव ग्रुप ने लॉन्च किया नया ब्रांड BizPry - लोकल से ग्लोबल तक 20 मई स्पेशल -इंटरनेट पर कविता कहानी और लेख लिखकर पैसे कमाएं - आपके लिए सबसे बढ़िया मौका साहित्य लाइव की वेबसाइट हुई और अधिक बेहतरीन और एडवांस साहित्य लाइव पर किसी भी तकनीकी सहयोग या अन्य समस्याओं के लिए सम्पर्क करें

राख़

नितिश सरोज पाण्डेय 11 Feb 2025 कविताएँ समाजिक 22196 0 Hindi :: हिंदी

"मुल्क का खूँ बहाकर क्या पाओगे
हुजरे की राख से क्या लाओगे
लड़ाते हो इंसा को तुम इंसा से 
बड़े बदनसीब हो जाने कब समझ पाओगे
कुनबे औरों के साथ तुम्हारे भी हैं ज़द में
दिन तो बीत ही जायेगा, 
शाम बिताने कहाँ जाओगे?"

क्या है तुम्हारी रंजिश का अस्बाब 
जरा बताओ तो
ढूंढते हो महफिले-गैर को जो,
क्या करोगे जब ढूंढ लाओगे
बिठा रखा है सारे वतन को मकतल के कफ़स में 
न खेलो आतिश-ए-आफताब से
यूँ बेखबर होकर, 
जल जाओगे

Comments & Reviews

Post a comment

Login to post a comment!

Related Articles

शक्ति जब मिले इच्छाओं की, जो चाहें सो प्राप्त कर लें। आवश्यकताएं अनन्त को भी, एक हद तक प्राप्त कर लें। शक्ति जब मिले इच्छाओं की, असम्भ� read more >>
शक्ति जब मिले इच्छाओं की, जो चाहें सो हांसिल कर कर लें। आवश्यकताएं अनन्त को भी, एक हद तक प्राप्त कर लें। शक्ति जब मिले इच्छाओं की, आसमा read more >>
इच्छा शक्ति 🥀🥀 शक्ति जब मिले इच्छाओं की, जो चाहें सो हांसिल कर कर लें। आवश्यकताएं अनन्त को भी, एक हद तक प्राप्त कर लें। शक्ति जब मिल� read more >>
Join Us: