Anilkumar Rathwa (Sameer) 14 Feb 2026 कविताएँ समाजिक "राह की मशाल" 9544 0 Hindi :: हिंदी
रास्ते मुश्किल हैं तो क्या, इरादे फ़ौलाद रखते हैं, हम वो नहीं जो किस्मत के भरोसे हाथ मलते हैं। पसीने की हर एक बूंद से अपना कल लिखेंगे, कदमों में मंज़िल होगी, या तज़ुर्बे बेमिसाल सीखेंगे। हार का नाम-ओ-निशां अपनी डायरी से मिटा दिया, हमने ख़ुद को अपनी ही मेहनत का आईना दिखा दिया। थक कर बैठना मंज़ूर नहीं, अभी तो उड़ान बाकी है, ये तो बस आगाज़ है, पूरी जीत की दास्तान बाकी है। गिरे अगर राहों में, तो फिर से उठ खड़े होंगे, हम हारने वालों में नहीं, हम लड़ने वालों में बड़े होंगे। दुनिया कहेगी कि मंज़िल दूर है, मगर हम कहेंगे— "मेहनत में कोई कमी नहीं, हम जीतेंगे या फिर सीखेंगे!"