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रंग-रुप देख क्यों जग हँसता

Meena ahirwar 28 May 2023 कविताएँ दुःखद कविता- दुःख # काली लड़की का दर्द# 59398 0 Hindi :: हिंदी

रंग-रुप देख क्यों जग हँसता, 
हर दिन रोज़ नये ताने कस्ता। 

कुदरत ने मुझे बनाया जैसा, 
 फ़िर क्यों घृणा करता जग मुझसे। 

मना काली हूँ पर मेरा क्या कसूर , 
मैं भी इंसान हूँ  मुझे चोट लगती है । 

हर दिन टूट जाती हूँ जब , 
काली-काली बोल चिड़ाते हैं सब। 

खामोस सहमी सी घर के , 
किसी कोने में आँसू बहाया करती हूँ। 

जैसा बनाया बैसी हूँ, 
फ़िर क्यों जग ताने कसते। 

उद्देश्य- इस कविता का मूल उद्देश्य है,की किसी व्यक्ति की भावना को ढेस नही पहुँचना चाहिए।
और ना ही किसी व्यक्ति को उसके रंग-रुप के लिए ताने देना चाहिए, जो जैसा है वह कुदरत की देन है। 

मीना अहिरवार, 
जिला- छतरपुर (म .प्र) ।

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