संदीप कुमार सिंह 20 Jun 2023 कविताएँ समाजिक मेरी यह कविता समाज हित में है। जिसे पढ़कर पाठक गण काफी लाभान्वित होंगें। 26421 0 Hindi :: हिंदी
रिश्ता दुनिया में बहुत ही अनमोल है,
जिवन में इसका विशेष रूप से मोल है।
संबंध में स्वार्थ का होना निषेध है,
परस्पर सहयोग भाव के मोल है।
रिश्तों की डोर बहुत ही नाज़ुक होती है,
इन डोरों को थामे रहने में मोल है।
रिश्तों में खुशियों का संसार है,
खुशियों का ही जीवन में मोल है।
रिश्तों में सुनना कहना रहता है,
इस सुनने कहने में प्रेम के मोल है।
रिश्तों को सजा संवार कर रखते हैं,
तभी तो रिश्तों में रब के मोल हैं।
रिश्ता बिना जिंदगी बेजार है,
सो रिश्तों का मानव में मोल है।
रिश्ता प्यार सद्भाव का प्रतिक है,
प्यार सद्भाव से स्वर्ग बने मोल है।
रिश्ता में संदीप शक्ति का आधार है,
शक्ति का जीवन जीने में मोल है।
(स्वरचित मौलिक)
संदीप कुमार सिंह ✍🏼
जिला:_समस्तीपुर(देवड़ा) बिहार
I am a writer and social worker.Poems are most likeble for me....