शरद भूषण मोंगरा 01 Jun 2026 कविताएँ धार्मिक आत्मा कभी नष्ट नहीं होती। 1588 0 Hindi :: हिंदी
यह किसी इतिहास का महल नहीं जो पुराना खंडहर हो जाएगा यह समुद्र का तूफान नहीं के सब बवंडर हो जाएगा ये कोई जिस्म या शरीर नहीं जो राख ख़ाक हो जाएगा यह कोई प्रलय या महा प्रलय नहीं जो चहुं और नाश हो जाएगा ये रूह का प्रकाश है तुम्हें और गहरे और गहरे प्रेम में ले जाएगा सत्य से मिलवाएगा और आत्म में जगाएगा वह सार, नाद, प्रकाश, आनंद, चेतना जिसका कभी अंत नहीं होता। जो सदैव रहने वाला अविनाशी है अनंत है "ईश्वर है" " परमात्मा" है यही श्रेष्ठ आत्मा है। शरद भूषण मोंगरा