कुमार किशन कीर्ति 12 Apr 2025 कविताएँ दुःखद उदास, मानवीय मूल्यों,दया 26752 0 Hindi :: हिंदी
आज सब उदास हैं।
पशु _पक्षी, पेड़ और पौधें।
आज सब शांत और उदास हैं।
नदी, निर्झरणी और खिलती कलियां।
आज सब खोए _खोए से हैं।
ये सुंदर नजारे और भौंरे।
मगर, जानते हो क्यों?
क्योंकि,आज मानव अपनी
मानवीय मूल्यों और दया को भूला गया है।
मगर, नहीं भूल पाया है...
हिंसा, द्वेष और छल _कपट।
नहीं भूल पाया है.…
दूसरों के अधिकार को हड़पना।
शोषण करना और प्रकृति से खिड़वाड़ करना।
इसलिए,आज सब उदास हैं।
क्या तुमने यह सब महसूस किया है?
: कुमार किशन कीर्ति।