Anilkumar Rathwa (Sameer) 01 Dec 2025 कविताएँ समाजिक "सफलता की सीढ़ियाँ" 9052 0 Hindi :: हिंदी
सफलता की सीढ़ी मेहनत और कोशिश से ही तैयार होती है, किस्मत तो बस चुपके से थोड़ी-सी हवा दे कर मददगार होती है। जो ठोकरों से घबराते हैं, वो मंज़िल का सुख नहीं पाते, जो गिरकर भी उठ जाते हैं, वही इतिहास रच जाते। अंधेरे में भी राह तलाशना सीख लो तुम, क्योंकि उजाला मेहनत की चिंगारी से ही पैदा होता है हर दम। भाग्य की ओर मत देखो, हाथों की लकीरों पर भरोसा मत करो, कदम बढ़ाकर अपने सपनों के दरवाज़े खुद खोलो। जहाँ पसीना बहता है, वहीं जीत का गुलाब खिलता है, और जहाँ लगन सच्ची हो, वहाँ मुकद्दर भी झुककर मिलता है।