Anilkumar Rathwa (Sameer) 26 Nov 2025 कविताएँ समाजिक "संघर्ष का सूरज" 25853 0 Hindi :: हिंदी
आप जो परीक्षा ले रहे हो न प्रभु, उसका तो मैंने फ़ॉर्म ही नहीं भरा था… पर जो भी सवाल भेजे हैं आपने, मैंने हिम्मत से हर एक हल किया था। रास्ते कठिन थे, पर कदम रुके नहीं, आँधियाँ चलीं, पर दीप बुझे नहीं, कभी गिरा, कभी संभला मैं— पर सपनों से अपने मुड़ा कभी नहीं। हर संघर्ष में आपका संदेश मिला, हर हार में जीत का प्रकाश मिला, जब टूटा तो भीतर एक शक्ति उगी, जब बिखरा तो खुद को नया रूप मिला। अगर ये आपकी परीक्षा है प्रभु, तो मैं पास होना चाहता हूँ, क्योंकि हर चुनौती ने मुझे और भी मजबूत बना दिया है। मैं चलता रहूँगा, लड़ता रहूँगा, रुकने का वादा आज नहीं… आप जो परीक्षा ले रहे हो न प्रभु, उसमें हार मानूँ— ये मेरा स्वभाव नहीं।