संदीप कुमार सिंह 02 Jun 2026 कविताएँ समाजिक समय = समय का खेल शीर्षक नाम की मेरी यह कविता आपको सच्चाई से रूबरू करायेगी. जीवन में हम लाख मेहनत करते हैं लेकिन अधिकतर लोगों को अपनी मंजिल नहीं मिल पाती है. मेरी यह कविता इसी सच्चाइ को उजागर किया है. आप लोगों से आग्रह है की एक बार अवश्य पधारें. आप सभी का हार्दिक स्वागत है. 592 0 Hindi :: हिंदी
माया अद्भुत जादू सा है ,समय = समय का खेल l हुनर मंद जिल्लत में जीते,चौर पुलिस का मेल l आज साधु डाकू बनते हैं, डाकू बनते संत = घर में इज्जत को तरसे जो,मौज बनी है जेल ll (स्वरचित मौलिक) संदीप कुमार सिंह*Author*
I am a writer and social worker.Poems are most likeble for me....