Anilkumar Rathwa (Sameer) 12 Aug 2025 कविताएँ अन्य सपनों का बाज़ार 24678 0 Hindi :: हिंदी
दुनिया खरीदने निकला था सपनों के बाज़ार में, कुछ लम्हे ही ले पाया, बाकी सब महँगा था। चाँद-सितारे बिकते थे हकीकत के सिक्कों पर, मोहब्बत का मोल मगर किसी ने न माँगा था। रौनक थी हर गली में, दिल में उजालों की चाह, हर मोड़ पे बिकता था इक नया-सा गुमान। मैं लेकर दिल की दौलत, उम्मीदों की थैली, निकला था ढूँढने बस सच्चा-सा आसमान। हर चीज़ की कीमत थी, सिक्कों में तौल दी, खुशियाँ भी बिक जातीं, ग़म भी अनमोल थे। पर जो सबसे सच्चा था — इक एहसास मोहब्बत, उसका कोई सौदा यहाँ कभी न खोलते थे। थक कर बैठ गया मैं, ख़्वाबों की इक दुकान पर, वो बोला: "इश्क़ के लिए, बस दिल चाहिए यार।" "मगर लोग दिल नहीं, बस चेहरे लाते हैं, मुस्कुराते हैं ऊपर, भीतर से रोते हैं..." मैं उठा, और पहली बार समझा— सपनों का बाज़ार, ख़्वाब बेचता नहीं... बस दिखाता है, ताकि लोग हमेशा उन्हें तलाशते रहें।