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"सिर्फ नौकरी नहीं, पहचान बनाओ"

Anilkumar Rathwa (Sameer) 18 Sep 2025 कविताएँ समाजिक "सिर्फ नौकरी नहीं, पहचान बनाओ" 15622 0 Hindi :: हिंदी

हर दिल में है अरमान यही,
सरकारी नौकरी मिले कहीं।
क्योंकि वहाँ सुरक्षा है, सुकून है,
भविष्य का जैसे पक्का जुनून है।

पर सोचो ज़रा, कुर्सियाँ गिनी-चुनी हैं,
लाखों की भीड़, पर जगहें सिमटी हुई हैं।
जब सब उसी राह पर भागे,
तो बेरोज़गारी के आँसू क्यों न जागे?

निजी काम को कोई अपनाए नहीं,
अपने हुनर को कोई आज़माए नहीं।
व्यापार, उद्योग, नए प्रयास,
यहीं से तो बनता है प्रगति का प्रकाश।

अगर हम कौशल को पहचानें,
मेहनत से नई राहें जानें।
तो रोज़गार की कोई कमी नहीं,
बस सोच को बदलने की ज़रूरी घड़ी है यही।

देश को चाहिए युवा जो सपने सजाए,
सिर्फ़ नौकरी नहीं, नए अवसर बनाए।
जब हर कोई रचता अपनी पहचान,
तभी मिटेगा बेरोज़गारी का तूफ़ान।

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