पोखर 01 Jan 2026 कविताएँ प्यार-महोब्बत हिंदी कविताएं 7923 0 Hindi :: हिंदी
स्वप्न में तुम्हें आकर गुजर जाना था जीने की गुजरती सुधी की तरह मगर तुम बैठ गई वहां जैसे बैठता है चांद निशा की गोद में। स्वप्न में तुम्हें दूर भाग जाना था जैसे भागे चपल गिलहरी पेड़ की ओट से मगर तुम ठहर गई वहां जैसे झलकते चंद्रमा से ठहरता है विनोद मातुल प्रेम में। मैं रोज सपनों-सपनों कूदता हूं ज्यों रात दिन पर कूदती है। तुम्हारे पास जाकर तुमसे दूर जाने की क्रीड़ा में बन जाता हूं चांद के पीछे दौड़ लगाता बच्चा।। पर सवेरे ठहरता है अकेलापन ज्यों ठहरता है मौन मृत्यु के बाद और तुम्हें ना पाने की याद हो जाती है भारी जैसे घटते चांद पर सूर्य भारी होता है। स्वप्न में तुमसे दूर जाने की क्रीड़ा में हार जाता हूं जैसे हारता हूं जीवन में तुम्हारे होने का आडम्बर डालते डालते।