Anilkumar Rathwa (Sameer) 26 Jan 2026 कविताएँ देश-प्रेम “संविधान की शपथ, भारत की उड़ान” 7182 0 Hindi :: हिंदी
आज तिरंगा सिर्फ लहराया नहीं, आज उसने हमसे वादा लिया है— कि हम अपने सपनों से बड़ा, अपने देश के लिए बनेंगे। ये गणतंत्र कोई तोहफ़ा नहीं, ये तपस्या है पीढ़ियों की। हर अधिकार के पीछे ज़िम्मेदारी की छाया है। किसान की मिट्टी से उठकर वैज्ञानिक की सोच तक, सैनिक की रात से लेकर बच्चे की पहली किताब तक— भारत हर हाथ में, हर साँस में बसता है। युवाओं— ये देश तुम्हारे इंतज़ार में नहीं, ये तुम्हारे साथ चलने को तैयार है। तुम्हारी मेहनत ही इसके भविष्य का नक़्शा है। अगर गिरो तो मिट्टी को दोष मत दो, उसे माथे से लगाकर उठो। क्योंकि इसी मिट्टी से इतिहास के स्तंभ खड़े होते हैं। आज गणतंत्र दिवस पर एक शपथ दिल में लिखो— नफ़रत नहीं, निर्माण करेंगे। डर नहीं, दिशा देंगे। तिरंगा हाथ में नहीं, चरित्र में चाहिए। ताकि दुनिया जब भारत देखे, तो उम्मीद देखे, इंसानियत देखे।