Chinta netam " mind " 30 Mar 2023 कविताएँ अन्य कोरोना काल 54701 0 Hindi :: हिंदी
# कोरोना काल में मेरी समसामयिक रचना
"क्षणिकाएं"
(१)
पौ फटते ही ,
लॉकडाउन लगते ही ,
बंद हो गई भट्टी शराब की ।
बेवड़ों के लिए अच्छी खबर
घर में रहिए ,सुरक्षित रहिए ,
घर में पहुंच रही सरकार आपकी।।
(२)
शराब भट्टी खुलते ही
लगती है वहां भीड़,
होते वहां गुत्थम गुत्था
बंट रही सरकारी खीर ।
जैसे मानव रूपी थके
पंछी का है वह नीड़ ।।
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(३)
होते यहीं से
लोग संक्रमित ,
नशे में सत्ता के
सब दिग्भ्रमित ।
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(४)
यह है कैसा
दोहरा मापदंड ?
शराब भट्टी खुला
मंदिर, मस्जिद बंद ।।
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(५)
गले के ऊपर से
भरी जिम्मेदारी,
यह क्यों /कैसी है ?
बड़ी लापरवाही ।
नहीं मिलेगी इसमें
कोई वाह-वाही ।
अब अगला चुनाव
जनता करेगी तय कि,
ये सरकार आही-जाही ।।
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चिंता नेताम " मन "