AAIDAN GOYAL 21 Aug 2025 कविताएँ दुःखद डिफ्रेशन / दुःख/ व्यंग्य/ अकेला/संघर्षों से अकेला साथी/डिफ्रेशन से बाहर निकल!! 18302 0 Hindi :: हिंदी
तू डिप्रेस है तो क्या... " तू डिप्रेस है तो क्या... एक बार अपनी सोच से बाहर निकल कर तो देख... सब तेरे साथ खड़े हैं, पर तू सबके साथ खड़े होकर तो देख... ना तू अकेला था, ना अकेला है, बस सबके साथ मिलकर तो देख... सब वैसा ही है, एक बार बाहर निकल कर तो देख... अपने मन से दुखः निराशा, का काला साथा हटा कर तो देख.... कुछ अपने दिल और दिमाग का हाल बयान करके तो देख.... सब तेरी मुस्कुराहट ढूंढ रहे हैं, एक बार अपने आंसू पोंछ कर तो देख... जी उठेगा पूरा घर तेरा और तू, एक बार फिर से जीकर तो देख.... आज हारा है तो क्या हुआ, कल खुद को जीता हुआ, सिकंद्र बनाकर तो देख... एक बार अपनी बनाई हुई, दुनिया से बाहर निकल कर तो देख... तू डिप्रेस है तो क्या... एक बार अपनी सोच से बाहर निकल कर तो देख...