Anilkumar Rathwa (Sameer) 14 Feb 2026 कविताएँ देश-प्रेम "तिरंगा मेरा कफन होगा" 17782 0 Hindi :: हिंदी
वो मोहब्बत ही क्या जिसमें खुद को खोया न जाए, वो शहादत ही क्या जिसपे देश रोया न जाए। दहेज में माँ ने दुआएं दीं और पिता ने हौसला, सरहद पर बेटे ने फिर अपना वादा निभाया। वो जिस्म खुशनसीब है जो तिरंगे में सिमट गया, वतन की मिट्टी का कर्ज लहू से पट गया। मौत का खौफ उन्हें क्या होगा यारो, जिनका दिल ही तिरंगे के तीन रंगों में बंट गया। केसरिया साहस बना, सफेद शांति की धार है, हरा हमारी खुशहाली, चक्र प्रगति का सार है। जब तक सांस रही, सीने में हिंदुस्तान रहा, मरकर भी जो न झुका, वो भारत माँ का लाल रहा।