MD SHAYEED ALAM 07 Nov 2025 कविताएँ समाजिक दिल में दर्द छुपा रखा है कविता 17189 0 Hindi :: हिंदी
दिल में इतना दर्द छुपा रखा है, क्या बताऊं? क्या-क्या दबा रखा है। जमाने ने बस हमारी मुस्कुराहटों को देखा है, उन्हें क्या पता? इसी से तो सारा गम छुपा रखा है। जब से होश संभाला है हमने, खुद को बस आंसुओं से गिरे देखा है। कोई क्या पता लगाएगा, दर्द कितना है? हमने हर किसी से अपना राज छुपा रखा है।।