Lalit Kumar Yadav 14 Nov 2024 कविताएँ समाजिक तू चल 38415 0 Hindi :: हिंदी
"दौलत से नहीं
शोहरत से चल
गरीबी में नहीं
फकीरी में चल
तू नादा है
तो
नादां ही चल
मिल ही जाएगी
मंजिल
एक दिन
यही विश्वास
तू
अपने साथ लेकर चल"
.... ललित