Jeevan kumar 05 Jan 2026 कविताएँ हास्य-व्यंग लगातार बच्चों की छुटियां और समय पर पाठ्यक्रम पूर्ण नहीं होने पर कुछ पंक्तियां। 11143 0 Hindi :: हिंदी
उलझन में पढ़ा शिक्षक परीक्षा नजदीक आए,
पाठ्यक्रम को समय नियम से पूरा न कर पाए,
लगी छुट्टी अतिवृष्टि की बच्चे स्कूल भूल जाए,
निकाल समय शिक्षक बच्चों को कैसे पढ़ाए?
समय का पहिया खींच रहा,दिनों सा महीना लग रहा,
परिणाम कैसा दिख रहा, पढ़ाई से नाता टूट रहा,
फिर!..शिक्षक पाठ्यक्रम पूरा कैसे कर पाए?
नियम रोज-रोज निकल रहे, शिक्षक की न सुन रहे,
परिणाम आपको रखना है,बच्चों को सब सीखना है,
आखिर!...एक शिक्षक कैसे पढ़ाए कैसे सिखाए?
आदेश कलक्टर का आता है,शीतलहर दर्शाता है,
न आना बच्चों स्कूल तुम,ठंड की स्कूल से दुश्मनी है,
पर!... पढ़ाई भी पूरी करनी है।
परीक्षा वार्षिक आई जब,पाठ्यक्रम पूर्ण हुआ कब,
बच्चे विचार में डूब रहे,बैठे-बैठे सोच रहे,
पाठ-प्रश्न आया कहां से,लिखूं उत्तर क्या पूछ रहा।
शिक्षक सोच में डूब रहा,पूरा न पाठ्यक्रम हो रहा,
‘जीवन’ जो ये लिख रहा, पढ़ने वाले को पढ़ा रहा,
जी हां, उलझन है ये एक शिक्षक की...............
जी हां, उलझन है ये एक शिक्षक की...............?
लेख:- जीवन कुमार