Suvayan Dey 22 May 2026 कविताएँ अन्य kavita 8966 0 Hindi :: हिंदी
सुबह की पहली किरण जब, धरती पर मुस्काती है, थके हुए हर इंसान को, नई राह दिखलाती है। अंधेरों से घबराना क्या, रात तो ढल ही जाती है, सपनों की छोटी सी चिंगारी, एक दिन सूरज बन जाती है। नदियाँ रुकती नहीं कभी, पत्थरों से टकराकर भी, मंज़िल उनको मिल ही जाती, रास्ते बदल जाने पर भी। जीवन एक खुली किताब है, हर दिन इसका नया पन्ना, कुछ आँसू, कुछ मीठी यादें, कुछ अपना, कुछ बेगाना। यदि मन में विश्वास जगे, तो मुश्किल आसान लगे, सूखे पेड़ भी खिल उठते, जब उम्मीदों के फूल खिले। चलते रहना ही जीवन है, रुकना इसका काम नहीं, जो खुद पर भरोसा रखता, उसका कोई हार नहीं।
My name is Suvayan Dey I have graduated from Ignou at BA Arts stream in History Subject at 2014...