Join Us:
दिशा-लाइव ग्रुप ने लॉन्च किया नया ब्रांड BizPry - लोकल से ग्लोबल तक 20 मई स्पेशल -इंटरनेट पर कविता कहानी और लेख लिखकर पैसे कमाएं - आपके लिए सबसे बढ़िया मौका साहित्य लाइव की वेबसाइट हुई और अधिक बेहतरीन और एडवांस साहित्य लाइव पर किसी भी तकनीकी सहयोग या अन्य समस्याओं के लिए सम्पर्क करें

बूढ़ा दरख़्त

Savita singh 30 Mar 2023 कविताएँ समाजिक दरख़्त 50493 0 Hindi :: हिंदी

उम्र दराज दरख्तों को, आंगन में लगे रहने दो,
फल दे ना दे , छांव बेहिसाब देगा ।
तुम बड़े हो जिस डाल के नीचे,
 तुम खेले हो जिस दरख़्त के पीछे ।
भूलों नहीं उसके रहमों -करम को ,
छेड़ो नहीं उसके जिस्मों-हरम को ।।
 तुम जड़ को छोड़कर पत्तों फलों में खो गए,
 तुम सच को छोड़कर झूठों के हो गए ,
सुनो........
जाओ बैठो एक बार फिर से ,
उस की छांव में ।
थक चुका है वह दरख़्त भी छाले लिए पांव में‌।।
रह लो कुछ वक्त उस ढूंढे दरख़्त के नीचे,
क्या पता....
कुछ कोपल ही निकल आए
 बिना तुम्हारे सींचे ।।

Comments & Reviews

Post a comment

Login to post a comment!

Related Articles

शक्ति जब मिले इच्छाओं की, जो चाहें सो प्राप्त कर लें। आवश्यकताएं अनन्त को भी, एक हद तक प्राप्त कर लें। शक्ति जब मिले इच्छाओं की, असम्भ� read more >>
शक्ति जब मिले इच्छाओं की, जो चाहें सो हांसिल कर कर लें। आवश्यकताएं अनन्त को भी, एक हद तक प्राप्त कर लें। शक्ति जब मिले इच्छाओं की, आसमा read more >>
इच्छा शक्ति 🥀🥀 शक्ति जब मिले इच्छाओं की, जो चाहें सो हांसिल कर कर लें। आवश्यकताएं अनन्त को भी, एक हद तक प्राप्त कर लें। शक्ति जब मिल� read more >>
Join Us: