Chinta netam " mind " 30 Mar 2023 कविताएँ राजनितिक राजनीतिक समसामयिक 79128 0 Hindi :: हिंदी
#समसामयिक
** वादा-खिलाफी **
हाथ में,
गंगा जल को लेकर,
बंद करने का,
वादा को कर,
यह चीज खराब ।
सत्ता की सरकार
दुकान में हो
या हो घर पर,
बेच रही शराब ।।
कारण इसके चलते
घर-घर में कलह ,
ना कोई सामंजस्य
ना कोई सुलह ।
खोते रिश्ते-नाते,
बिखरते परिवार ,
टूटते घर,
जाने क्या-क्या तमाशा...
दिखाता यह जहर !
अभी अभी तो ,
हुई एक घटना,
पांचों का,
बेदर्दी से कटना ।
हुए है अभी
और भी होंगे...
ना कोई संवेदनाएं
ना कोई चेतना ।।
मेरे गढ़ की ,
भोली जनता
सब देख ,
रही है जनाब ।
सत्ता की सरकार,
बंद करने का
वादा करके,
बेच रही शराब ।।
चिंता नेताम "मन"
डोंगरगांव (छत्तीसगढ)