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पेड़ काट कर छांव ढूंढ रहे है

Pankaj yadav 04 May 2026 कविताएँ दुःखद 6007 0 Hindi :: हिंदी

पेड़ काट कर हम छाँव ढूंढ रहे हैं...
शहर में आके हम गाँव ढूंढ रहे हैं...
किसको पता था, जिंदगी ऐसी कटेगी...
डूब कर मझधार में अब नाव ढूंढ रहे हैं..."

                                       अजय यादव

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