Anilkumar Rathwa (Sameer) 13 Nov 2025 कविताएँ समाजिक “वक़्त के संग चलना सीखो” 13640 0 Hindi :: हिंदी
बदल जाओ वक़्त के साथ, या फिर वक़्त बदलना सीखो, राहें आसान नहीं होतीं, पर मंज़िल तक चलना सीखो। शिकायतों से कुछ न होगा, हर हाल में मुस्काना सीखो, ग़मों को छिपा कर सीने में, फूलों सा खिल जाना सीखो। हर ठोकर एक सबक देती है, हर हार में जीत छुपी होती है, जो खुद पर यक़ीन रखता है, किस्मत भी उसकी झुकी होती है। मत कोसो अपनी मजबूरियों को, इनसे ही तो हुनर निकलता है, जो वक़्त के साथ चलना जानता है, वही इतिहास में अमर कहलाता है।