Meenakshi Tyagi 27 Mar 2026 कविताएँ अन्य Aruna, pooja, shivani 9817 0 Hindi :: हिंदी
कद्र ना की जिसने वक़्त की आज क्या वक़्त भी कल उसकी कद्र कर पायेगा ये तो विधि का विधान है, इसे कौन बदल सकता है? कि जैसा बीज बोएगा तू, वैसा ही फल पायेगा।। संभाला नहीं है जो अभी वक़्त रहते, एक दिन ये वक़्त उसे इस तरह गिराएगा।। कि उठने की लाख कोशिशें हो फिर, वक़्त तो उसे बस रौंदकर ही जायेगा।। सम्भल जा वक़्त रहते हुए ए मुसाफिर, वरना इस आणि जानी दुनिया में, तेरा भी पता न पायेगा।।