MUKESH KUMAR DHODHAWAT 02 Aug 2025 कविताएँ अन्य #में कल यहां से चला जाऊंगा शायद कभी लौट कर नहीं आऊंगा 21538 0 Hindi :: हिंदी
मैं कल यहां से चला जाऊंगा शायद कभी लौट कर नहीं आऊंगा दुखे नहीं हम किसी को सबके दिलों पर राज किया महक रखी हमने फुलों सी माली बनकर काम किया में अपनी महक से तुझे महकाऊंगा मैं कल यहां से चला जाऊंगा शायद कभी..... देवदूत बनकर सहायक रहे सभी आप मेरे मेरा परिवार बनकर सभी साथ रहे आप मेरे काम में तुम्हारे हर बार आऊंगा मैं कल यहां से चला जाऊंगा शायद कभी..... हर बार चेहरे ही बदला करते हैं लेकिन तुम्हारे प्यार ने मेरा मन बदल दिया रहे मेरे साथ मेरे भाई सा मेरा जीवन बदल दिया ऐसा प्यार में फिर नहीं पाऊंगा मैं कल यहां से चला जाऊंगा शायद कभी लौट कर.... सुना है अक्सर जाने वाले माफी मांग कर जाते है कि सब अच्छे से रहना यह कहकर जाते है शायद में भी यही कहकर जाऊंगा मैं कल यहां से चला जाऊंगा शायद कभी लौट..... विदा की इस पावन घड़ी एक काम कर देना यार मेरे ग़म को हँसी में बदल देना यार मिले फुर्सत तो फोन पर बात कर लेना यार तुम्हारी याद के पल फिर से जी पाऊंगा मैं कल यहां से चला जाऊंगा शायद कभी लौट कर नहीं आऊंगा मुकेश कुमार धोधावत 7726075950 कृपया इस कविता को पढ़कर अपनी राय जरूर देवे