Vipin Bansal 19 May 2023 कविताएँ समाजिक 52010 0 Hindi :: हिंदी
कविता = ( केरल कहानी )
वेद शास्त्र जो हमें मिले !
हमने उनको कहाँ पढ़ा !!
ये दौलत जो हमें मिली !
हमने उसको दिया लुटा !!
शिक्षित होकर भी अशिक्षित !
हमें अभी ये कहाँ पता !!
वेद शास्त्र आज पूछ रहे !
हमसे हुई क्या ख़ता !!
अपने ही घर में ग़ैर हुए !
किस जुर्म की हमें मिली सज़ा !!
वेद शास्त्र जो हमें मिले !
हमने उनको कहाँ पढ़ा !!
शुद्ध हिंदी में भी पिछड़ गए !
मातृभाषा की देख दशा !!
अपने ही घर में अंग्रेज़ी !
आज हो गई देख खुदा !!
मुगलों का इतिहास पढ़ाया !
डाकूओं को खुदा बताया !!
आज़ादी के जो थे नायक !
हमसे गया उन्हें छिपाया !!
धर्मग्रंथों से दूर किया !
बताओ ये किसकी रज़ा !!
वेद शास्त्र जो हमें मिले !
हमने उनको कहाँ पढ़ा !!
कैसे नर्क हुई ज़िंदगानी !
आँखों में भर आए पानी !!
केरल कहानी कलम ज़ुबानी !
अज्ञानता की वो निशानी !!
धर्मग्रंथ से बिटिया दूर हुई !
कैसे ज़िंदगी दोज़ख हुई !!
माँ बाप से भी भूल हुई !
बिटिया से तभी चूक हुई !!
धर्मग्रंथ गर होता पढ़ा !
फिर न आती ऐसी ख़िज़ाँ !!
वेद शास्त्र जो हमें मिले !
हमने उनको कहाँ पढ़ा !!
जन्नत को जहन्नुम बनाएं !
जन्नत के ही ख़्वाब दिखाएं !!
जिन्दो को बर्बाद करें !
मुर्दों को आबाद करें !!
मुर्दों की बस्ती में !
मुर्दों पर यह राज करें !!
जन्नत के यह देखें स्वप्न !
नसीब न हो इन्हें कफ़न !!
अब रूख़सत हो ये ख़िज़ाँ !
फिर से आए वो ही फ़िज़ा !!
वेद शास्त्र जो हमें मिले !
हमने उनको कहाँ पढ़ा !!
विपिन बंसल