मोती लाल साहु 23 May 2023 कविताएँ समाजिक अच्छा वक्त है हमारा, मैंने कितने ही वक्त कुर्बान किए हैं- इसी वक्त के लिए- तुम्हारे लिए- तुम्हारे ही मोहब्बत के खातिर। 33304 0 Hindi :: हिंदी
मैंने कितने ही वक्त- कुर्बान किए हैं इसी वक्त के लिए! यह अच्छा वक्त है हमारा,, तुम्हारे लिए- तुम्हारे ही मोहब्बत के खातिर!! -मोती