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यथासम्भव प्रयास-निराश हुई आहत् हुई भावनाएं यथासम्भव प्रयास जब निरन्तर निष्फल हुऐ

Raj Ashok 06 Aug 2023 कविताएँ समाजिक यथासम्भव प्रयास 38198 1 5 Hindi :: हिंदी

निराश हुई, आहत् हुई 
भावनाएं
यथासम्भव प्रयास ,जब निरन्तर
निष्फल हुऐ ।, 
कमजोर हो रहा था।  मनोबल  ।
संघर्ष के मैदान थमे  
दाँव,पर धी  जिन्दगी ,
सोचते तो, क्या सोचते ?
अन्तिम फैसला, दिल का यही था। 
 हार नहीं सकते । अभी 
कुछ ही क्षण बाद ...
फिर उठे.
आत्म -विश्वास की ज्योत
मन मे जगा के
बढाने, लगे अपना कौसल -वैभव
प्रयास फिर से तेज किए 
फिर  से वही विजय  सोच ,लिए
हमें सुबहाँ जगाती है। 
तब से अब तक जारी है। 
जंग-जीवन की
योही । 
लोग हमें हर कदम आज भी 
हतास करते है। 
पर हमने कहाँ हिम्मत हारी है।
क्योकि .....
अपनी ,जंग अभी जारी है।

Comments & Reviews

Sudha Chaudhary
Sudha Chaudhary बहुत सुंदर

2 years ago

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